TRAI New SMS Rules 2025: अब Spam SMS और Fake Links का खेल खत्म! जानिए Message में लिखे 'P, S, T' कोड्स का असली मतलब


क्या आप Spam SMS और Banking Fraud से परेशान हैं? जानिए TRAI और DoT के नए नियमों के बारे में। अब SMS में URL Blocking और P, S, T कोड्स कैसे आपकी सुरक्षा करेंगे, पूरी जानकारी हिंदी में।


क्या आप State Bank of India (SBI), HDFC Bank, या किसी अन्य सरकारी बैंक के ग्राहक हैं? अगर हाँ, तो आपको दिन भर में कई ऐसे SMS आते होंगे जिनमें "Personal Loan Approved" या "KYC Update" करने का दावा किया जाता है। अक्सर हम असली और नकली मैसेज में फर्क नहीं कर पाते और Cyber Fraud का शिकार हो जाते हैं।

लेकिन अब खुशखबरी है! Department of Telecommunications (DoT) और TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) ने मोबाइल यूजर्स की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने Spam SMS और Phishing Links को रोकने के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि ये नए नियम क्या हैं, Link Whitelisting क्या है, और मैसेज के आखिर में दिखने वाले P, S, T कोड्स का आपकी सुरक्षा से क्या लेना-देना है।


1. सबसे बड़ा बदलाव: Unverified Links अब नहीं होंगे डिलीवर

डिजिटल इंडिया के दौर में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी SMS में आने वाले Malicious Links (URLs) के जरिए होती है। हैकर्स आपको एक लिंक भेजते हैं, और क्लिक करते ही आपका फोन हैक हो जाता है या बैंक खाता खाली हो जाता है।

TRAI का नया नियम क्या कहता है?

अब से, Telecom Operators (जैसे Jio, Airtel, Vi, BSNL) अपने नेटवर्क पर Scrubbing शुरू कर चुके हैं। इसका मतलब यह है कि:

  • अगर किसी मैसेज में कोई Link (URL) या APK File का लिंक है, और वह लिंक Whitelisted (Verified) नहीं है, तो वह मैसेज आपके फोन तक पहुँचेगा ही नहीं।

  • कंपनियों (Principal Entities) को अपने लिंक्स को पहले DLT Platform पर रजिस्टर करवाना होगा।

  • यह नियम उन Fake APKs और Phishing Sites पर लगाम लगाएगा जो बैंकिंग फ्रॉड का मुख्य कारण हैं।


2. SMS Categories को समझना: क्या है P, S और T का मतलब?

नए नियमों के तहत, अब हर कमर्शियल मैसेज को एक खास Category में बांटा गया है। मैसेज के कंटेंट या हेडर (Header) को देखकर सिस्टम यह तय करता है कि वह मैसेज किस तरह का है। इसे समझने के लिए Series Tags (Prefix/Suffix) का इस्तेमाल हो रहा है।

आइये इन कोड्स को डिकोड करते हैं:

(A) Code 'P' – Promotional SMS (प्रमोशनल मैसेज)

ये वो मैसेज होते हैं जो पूरी तरह से मार्केटिंग या विज्ञापन के लिए होते हैं।

  • उदाहरण: "Big Billion Days Sale! Get 50% Off on Electronics."

  • नियम: अगर आपने अपने नंबर पर DND (Do Not Disturb) सर्विस एक्टिवेट कर रखी है, तो 'P' कैटेगरी वाले मैसेज ऑटोमैटिकली ब्लॉक हो जाएंगे। यह आपको फालतू के विज्ञापनों से बचाएगा।

(B) Code 'T' – Transactional SMS (ट्रांजैक्शनल मैसेज)

यह कैटेगरी सबसे महत्वपूर्ण है। ये वे मैसेज हैं जो रियल-टाइम बैंकिंग या जरूरी लेन-देन से जुड़े होते हैं।

  • उदाहरण: बैंक से पैसे डेबिट/क्रेडिट होने का अलर्ट, OTP (One Time Password), या Net Banking ट्रांजेक्शन।

  • नियम: 'T' कैटेगरी वाले मैसेज पर DND लागू नहीं होता, क्योंकि ये जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है।

(C) Code 'S' – Service Implicit/Explicit (सर्विस मैसेज)

ये मैसेज विज्ञापन नहीं होते, बल्कि उन सेवाओं से जुड़े होते हैं जिनका उपयोग आप पहले से कर रहे हैं।

  • Service Implicit: जैसे "आपका Amazon Order शिप हो गया है" या "आपका रिचार्ज खत्म होने वाला है"।

  • Service Explicit: ऐसे अपडेट्स जो आपने खुद मंगाए हैं।


3. Traceability: अब नहीं बच पाएंगे Scammers

पहले स्कैमर्स Fake ID पर सिम कार्ड लेकर लाखों स्पैम मैसेज भेजते थे और फिर सिम फेंक देते थे। उन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता था। लेकिन अब End-to-End Traceability लागू हो गई है।

  • Sender Tracking: अब मैसेज भेजने वाले से लेकर उसे डिलीवर करने वाले नेटवर्क तक, हर स्टेप रिकॉर्ड होगा।

  • Blacklisting: अगर कोई Telemarketer या कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है, तो उनका कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा और उन्हें 2 साल के लिए Blacklist कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि वे किसी और ऑपरेटर से भी सेवाएं नहीं ले पाएंगे।


4. एक जागरूक यूजर (User) के तौर पर आपको क्या करना चाहिए?

भले ही सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं, लेकिन Cyber Criminals नए तरीके ढूंढते रहते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  1. Header चेक करें: बैंक के मैसेज हमेशा सही हेडर के साथ आते हैं (जैसे: BZ-SBIINB या VM-HDFCBK)। अगर कोई मैसेज पर्सनल मोबाइल नंबर (+91...) से आया है और बैंक का दावा कर रहा है, तो वह 100% फेक है।

  2. Chakshu Portal का इस्तेमाल करें: अगर आपको कोई संदिग्ध मैसेज या कॉल आता है, तो सरकार के Sanchar Saathi Portal (Chakshu) पर जाकर उसकी शिकायत दर्ज करें।

  3. Links पर क्लिक न करें: अगर किसी मैसेज में लिंक है लेकिन वह http है (secure https नहीं) या कोई अजीब सा शॉर्ट लिंक (bit.ly) है, तो उसे ओपन न करें।


निष्कर्ष (Conclusion)

भारत सरकार और TRAI का यह कदम Digital Security की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। Link Blocking और Categorization (P, S, T) सिस्टम से न सिर्फ हमारा इनबॉक्स साफ रहेगा, बल्कि हम अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख पाएंगे।

अगली बार जब आपके फोन की घंटी बजे, तो मैसेज को ध्यान से पढ़ें और देखें कि वह किस कैटेगरी (Code) का है। याद रखें, सर्तकता ही बचाव है!


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